Do not make//मत बनाओ!!

For the sake of chicks press Dana Dunka in the beak 

Do not make candies go away, 

Truly the heart breaks down and sees the corpses 

Do not make childhood childhood as a national dish, 

Will write tomorrow all this nunihal our history 

Do not make the paper rig out of death, 

This plant will be made only tomorrow 

Do not whack out of their delicate white skin, 

Shoulder shoulder to carry his burden 

Do not make them thorny roses, 

Seeing the bright moon stars will learn it 

Do not make them landed by understanding your understanding, 

The wings are fluttering and the status of the wings 

Do not make any boundary wall on the open sky chest, 

How long will it eat from a mother’s beak to beak 

Do not resort to old age in your fanfare.

चूजों की खातिर चोंच में दाना दुनका दबाये

उडे चले जा रहे परिन्दों को निवाला मत बनाओ,

सचमुच दिल टूटकर बिखरता है देखकर लाशें

दूधमुंहे बचपन को यूं सियासी बिसात मत बनाओ,

लिखेंगे कल यही सब नौनिहाल हमारा इतिहास

कागज की किश्ती को मौत का सामान मत बनाओ,

यह पौध ही बनेगी आने वाले कल की नवबहार

इनकी नाजुक सी चमडी उधेडकर चाबुक मत बनाओ,

अपना बोझ ढोने के लिए चाहिए ताकतवर कंधे

पाने दो तो सही कद इन्हें कंटीली झाडियां मत बनाओ,

चमकते चांद सितारे देखकर सीखेंगे यह उचकना

अपनी समझ लादकर इन्हें जमीनी गडढे मत बनाओ,

पंख फडफडाकर तौलते हैं यह पंखों की हैसियत

खुले आसमान के सीने पर कोई चारदीवार मत बनाओ,

मां की चोंच से लेकर चोंच में यह खायेंगे भी कब तक

अपनी चाहत के झांसे में बुढापे का सहारा मत बनाओ।।

“Pkvishvamitra”



Book!!//किताब!!

This world is like a river flowing downstream 

We are like the banks of the river, staying in one place, 
Life is like a parrot 
Dreams are flying in the sky without feathers, 
Settlements form a cement / concrete forest 
The bare mountains are seen without jungle, 
Where is the peepal chase, the sun’s rising sun 
Sounds a caravan of milestones, 
The wall is tangled with color like old age 
Home champs come and watch them steal, 
The shifts of your life are playing all over here 
Giving himself cheating himself hollow, 
Everybody is a beautiful book like a beautiful book We are also fluttering pages of any such book.

!!किताब!! 

यह दुनिया तो है नदी के उफनते हुए बहाव जैसी

हम नदी के किनारे जैसे हैं एक ही जगह ठहरे हुए,

जिन्दगी है परिन्दों की तरह चहकती बहकती हुई

सपने हैं बिना पंख के आसमान में उडान भरते हुए,

बस्तियां बनकर फैला है सीमेन्ट/कंक्रीट का जंगल

दिखाई देते हैं नंगे पहाड जंगल के बिना सुबकते हुए,

कहां है पीपल की छांव डूबते उगते सूरज के नजारे

मिलता है मील के पत्थरों का कारवां सिसकते हुए,

हो गये हैं दीवार टंगी हुई बदरंग तस्वीर जैसे बुढापे

घर के चिराग आते हैं नजर उनसे निगाह चुराते हुए,

अपनी जिंदगी की पारियां खेल ही रहे है सभी यहां

देते हैं खुद को खुद धोखा खोखले ठहाके लगाते हुए,

हरेक इंसान है यहां खूबसूरत जिल्द चढी किताब जैसा

हम भी हैं ऐसी ही किसी किताब के पन्ने फडफडाते हुए।।

“Pkvishvamitra”

#आईना/Mirror!!


#आईना
#YQ Baba
#YQ Didi

Follow my writings on https://www.yourquote.in/pramod-kaushik-df0a/quotes/ #yourquote

A mirage of living a mirror 
The mirror has seen fragments splinter into pieces, 
Huts are the victims of hurricanes 
Even the hawlies have seen the dismay, 
All times are weighed in the scales of time 
We have seen the measurement of the measurement and the balance of the balance, 
Unless written books are created, Tajurbe 
Who has learned how to make houses by wild cherries, 
The height of the height of the physical height is faint 
The high peak camel has learned this lesson from the hills.
“Pkvishvamitra”

Word!!//शब्द!!

All these words are alien 

Among them, there is a genetic disease that is ours, 
The pleasure of the years is as light as the leaves 
Pain is very heavy to the moment, 
The knives are we 
The syllable is a live painting, 
The stylus of the text document is 
The juice contained in the juice stanza is magnificent, 
Disclaimer of the Prophets 
These swords of abstract summaries are dual, 
The noise of consolation is horrific 
Syllabic is all alphabetical, 
Word-phrase 
This mode of expression is miraculous.शब्द!!

ये सब शब्द पराये हैं तो क्या हुआ

इनमें गुंथी हुई पीड तो हमारी ही है,

बरसों का सुख है पत्तों जैसा हल्का

वेदना पल भर की ही बहुत भारी है,

गूंथी हैं हमने विरह की जो पंक्तियां

शब्दांश की सजीव वह चित्रकारी है,

लेख प्रलेख की शब्दमयी है तूलिका

रस छंद में निहित भाव अलंकारी है,

मन्तव्यों की प्रकटीकृत हैं श्रंखलायें

सार संक्षेपों की ये तलवार दुधारी है,

अन्तःकरण के कोलाहल हैं भीषण

शब्दांश ही समस्त अक्षरतः उद्गारी है,

शब्द में शब्द पिरोकर बने वाक्यांश

भाव प्रदर्शन की ये विधा चमत्कारी है।।

“Pkvishvamitra”

Attachments!!

You come in my side 

Or I’ll be back 
By breaking the cage of the body
You will also go one day 
I will go one day 
Leaving the cage of the cage, 
You are too gigantic 
I am also very disappointed with frustrated 
Taking the cage of the cage, 
In the morning is the evening hand 
The day has turned down the night 
All of them will go away like this, 
Night’s courtyard is empty empty 
The heart of the day is sadness 
is standing empty emptiness chest tightly,
Sand stone sand dunes 
Thorn bunds of thorns 
Who has come to celebrate the autumn, 
Reduce the amount of the pair by adding less 
Keep adding pair of attachments in attachment 
Zero with zero pair added ..तुम चले आओ मेरे पहलू में

या फिर मैं ही चला आऊंगा

पिंजर के पिजरे को तोडकर,

तुम भी चले जाओगे एकदिन

मैं भी चला जाऊंगा एक दिन

पिंजर के पिंजरे को छोडकर,

तुम भी तो हो बेहद गमगीन

मैं भी बेहद निराश हताश हूं

पिंजर के कफन को ओढकर,

सुबह झटकती है शाम का हाथ

दिन ने ठुकराया है रात का साथ

सब जायेंगे ऐसे ही साथ छोडकर,

रात का आंगन है खाली खाली

दिन का दिल है उदासी उदासी

खडा है खालीपन सीना तानकर,

उजडे उजडे से बालुई रेत के टीले

कंटीली झांडियों के झुरमुट संपीले

कौन आया है पतझड को न्यौतकर,

जोड में से घटा घटाकर जोडते रहे

जोड में ही जोड का जोड बनाते रहे

शून्य में शून्य ही जोड आया जोडकर।।

“Pkvishvamitra”

मुहावरी कहावत!!//Idiom’s!!

आसमान से टपकी बारिश की एक बूंद जैसी

बनकर इंसानियत रेत के ढेर पर टपक गयी है,

नाटकीयता के नाट्यमंच पर मानवीय संवेदना

लेपित श्रंगार की दिखाऊ परतों में खो गयी है,

रूढियों की अनुमन्य सी जंजीरों में जकडी हुई 

प्रगतिशीलता निकृष्टतम की बंदिनी हो गयी है,

स्वार्थी मानसिकता का है आडम्बरिक पाखंड

निर्लज्ज बाजारू मनोदशा धुरंधरता हो गयी है,

कथनी करनी में भिन्नता है विद्वता का परिमाप

थूककर थूक चाटना राजकीय दक्षता हो गयी है,

अलटू पलटू ही तो हैं सधे हुए राजनैतिक खिलाडी

अब अदला बदली सराहनीय धार्मिकता हो गयी है,

खुली आंख सपने दिखाकर जो बनाये मुंगेरीलाल

शब्द प्रस्तुति वह भावप्रवण आदरणीय हो गयी है,

आसमान से गिरे खजूर पर अटके होती है नियति

वास्तविकता में मुहावरी कहावत चरितार्थ हो गयी है।।

https://translate.google.com/translate_nv?depth=1&hl=en&nv=1&rurl=translate.google.com&sp=nmt4&u=https://pkvishvamitra.tumblr.com/post/163952658392/%25E0%25A4%25AE-%25E0%25A4%25B9-%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25B0-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B9-%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25A4

Muhawari proverbs !!

A drop of rain from the sky 

Humans have leaked on the heap of sand, 

Human sensation on the theatrical drama 

The coated adornment is lost in the splendid layers, 

Stereotype 

Progressivity has become the worst of the worst, 

The hypocritical hypocrisy of the selfish mindset 

The blatant market has become a mood, 

There is a difference in word of scholarship 

Spit lick has become a political competence, 

Alatu Palatu is the only political player 

Now the swap has become commendable religiousness, 

Mungerilal made by showing open eyes 

The word presentation has become passionate, 

Destiny is falling on dates falling from the sky 

In reality, the idiom has become very popular

“Pkvishvamitra”