तलाश!!

लफ्फाजी के ढेर में उम्मीदें दफन हैं,

नाउम्मीदी की लाश पर बेबसी का कफन है,

वो शिगूफों की तराजू से अरमान तौलता है,

वो मजहबिया बादलों की बूंदों में जहर घोलता है,

शातिराना ढंग से हालातों को ढालकर सलीब की शक्ल में

वो उन पर लटकी हुई लाशों की जेबें टटोलता है।-पीके

चुनावी बजट?.

नैतिकता के मामले में भाजपा की कंगाली जगजाहिर है,2012 में इन्हीं राज्यों के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उस समय की विपक्षी पार्टी ने बजट प्रस्तुति को अनैतिक लाभ प्राप्त करने की कोशिश बताकर चुनाव आयोग के सामने चक्कर काटने शुरू कर दिये थे और तत्कालीन यूपीए सरकार ने एनडीए के रूदाली बनकर किये गये विलाप से द्रवित होकर 1मार्च की जगह 16 मार्च को चुनाव सम्पन्न होने के उपरान्त बजट पेश किया था,विपक्ष में रहकर भाजपा जिस भी काम को अनैतिक घोषित करती रही है सत्तारूढ होने के उपरान्त वही सारे अनैतिक काम नैतिकता का ढोल पीटकर कर रही है।

नीयत ही नीति!!

इसे नीयत से उपजी हुई नीति ही कहा जायेगा क्योंकि दिल्ली की “आप”सरकार कुछ करने की नीयत का प्रदर्शन करने से कभी नहीं चूकती है इसके लिए वह धन्यवाद की पात्र है,रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त किसी व्यक्ति को देखकर लोग मुंह मोडकर आगे निकल जाते थे और कानूनी पचडों से बचने के लिए घायल की सहायता नहीं करते थे और अस्पताल नहीं पहुंचाते थे,इस स्थिति के पीछे छिपे हुए मनोविज्ञान को “आप” सरकार ने समझने का प्रयास किया है और समझा भी है,इस समझ का ही परिणाम है कि “आप” सरकार ने किसी दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति को चिकित्सालय पहुंचाने वाले व्यक्ति को 2000 रूपये नकद प्रोत्साहन स्वरूप धनराशि तथा प्रशस्तिपत्र देने का प्राविधान किया है,इस प्राविधान से उत्साहित व्यक्ति किसी घायल व्यक्ति को सगर्व चिकित्साल पहुंचायेगा,अर्थात इस प्राविधान के शुभ परिणाम सुनिश्चित रूप में प्राप्त होंगे तथा मानवीय मनोभाव का विकास भी होगा,इस प्राविधान को पूरे देश में लागू किये जाने की आवश्यकता है।

PayTm?.

पीएम मोदी ने PayTm का Jio की तरह प्रचार किया है,यह प्रचारी भूमिका जहां पीएम की पदीय नैतिकता पर हमला है वहीं इन कम्पनियों के हितों की चौकीदारी करने का कारण खोजने की आवश्यकता प्रस्तुत करना भी है,चुनावी चंदे के रूप में कॉरपोरेट समूह अपना काला/पीला धन राजनीति में निवेश करता है यह वास्तविकता अब किसी से छिपा हुआ सच नहीं है,मोदी को अडानी/अम्बानी ने अपने राजनैतिक चेहरे के रूप में प्रायोजित किया था,यह सर्वमान्य तथा सर्वज्ञात सत्य है,मोदी सरकार के कामकाज और नीतियों से अभी तक यही कॉरपोरेट समूह सर्वाधिक लाभ प्राप्त करने में सफल रहे हैं,अब Paytm के बारे में भी एक आरोप उछाल ले रहा है कि वह भाजपा की चुनावी सभायें प्रायोजित कर रहा है,यह गम्भीर भ्रष्टाचार का मामला है और जनता के साथ किया गया धोखा भी है,इस सम्बन्ध में जनता को मुखर स्वर में वस्तु स्थिति स्पष्ट कराने के लिए मांग करनी चाहिये,सम्यक जांच करायी जानी भी आवश्यक है क्योंकि लोगों का मानना है कि सरकार ने Paytm को जनता की ऐसी तैसी मारने का ठेका चीन से जुडी हुई इस कम्पनी को मुफ्त में तो बिल्कुल भी नहीं दिया है।

चोर जीत गया?.

और चोर जीत गया,यह लोकतंत्र है या मजाक तंत्र है?.लोकतंत्र का मतलब बुद्धि से पैदल लोगों के समूह से बना तंत्र तो बिल्कुल भी नहीं है लेकिन भारत की गलियों और देहातों से लेकर शहरों तक तथा पढे लिखे लोगों से लेकर अनपढों तक अपरिपक्व निर्णय चोरों के जीत जाने का आधार बन जाते हैं,मैं भी एक ऐसे ही समूह का हिस्सा हूं जो चोर की ही जीत निर्णायक बनता है,अफसोस एक सर्टिफाईड चोर फिर जीत गया है और उसे उन लोगों ने जिताया है जो चोर से घृणा करने का शानदार अभिनय करते हैं।