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Hope!!//उम्मीद!!

This is to make ends meet 

New hope awakens after a hope breaks down, 
Someone dies by pressing the burden of the razors 
Some folks change their fate kissing, 
Look at the people who want to make a house 
In the slum belt only his entire age passes, 
Miles away, some women still water 
Trails are formed by the traces of their strict steps, 
The old peepal of the village makes me some gesture 
Even the sunshine and sunshine also become shade even in the shade, 
The clouds which roam on the chest of the sky 
The flowing water of his tears touches the ground, 
Incomplete hopes are fulfilled in expectations 
Thirst is also sometimes used to create water, 
Not necessarily the will to strengthen the will of betting 
The rider reached the shore also drops suddenly, 
Always keep the lamp’s intentions bright 
The number of times lost is turned into a win.

यह तो हैं उम्मीदों के टूटते बनते हुए ताने बाने

एक उम्मीद टूटने के बाद नयी उम्मीद जाग जाती है,

कोई मर जाता है आरजूओं के बोझ में दबकर

कुछ लोगों की किस्मत चुटकी बजाते बदल जाती है,

घरौन्दा बनाने की चाहत पाले हुए लोगों को देखो

झोपड पटटी में ही उनकी पूरी उमर यूंही गुजर जाती है,

मीलों दूर से ढोती हैं आज भी कुछ औरतें पानी

उनके सख्त कदमों के निशानों से पगडंडी बन जाती है,

गांव का वो पुराना पीपल करता है मुझे कुछ इशारा

छांव भी कभी धूप और धूप भी कभी छांव बन जाती है,

आसमान की छाती पर उमडते घुमडते हैं जो बादल

उनके आंसूओं की टपकती हुई झडी जमीन छू जाती है,

पूरी हो चुकी उम्मीदों में गूंथी होती हैं अधूरी उम्मीदें

प्यास भी कभी कभी पानी बनकर हलक सहला जाती है,

जरूरी नहीं है इरादों की मजबूती बनेगी जीत की शर्त

किनारे पर पहुंची हुई किश्ती भी तो अचानक डूब जाती है,

बुलन्द इरादों के चिरागों को हमेशा रखिये ऐसे ही रोशन

कितनी ही बार हारी हुई बाजी भी तो जीत में बदल जाती है।।

“PKvishvamitra”

The Accident!!//हादसा!!

मौत की गोद में मौत के फरमान को
हादसों की गोद हादसों के नमूनों को

अपना असली कद पाते हुए देखा है,

किसी की चूक थी या थी लापरवाही

साजिश थी या थी वक्त की ख्वाहिश

किसी को मौत के मुंह में समाते देखा है,

दबे पांव सधे हुए कदमों से आगे बढता

जिन्दगी का बना बनाया खेल बिगडता

जिंदगी को हादसों से हारते हुए देखा है,

छटपटाती हुई जिन्दा रहने की चाहत

फडफडाती हुई बच जाने की चाहत

घायल जिस्मों को कराहते हुए देखा है,

मजहब की हदों में उलझे हुए इन्सान

छोटी छोटी बातों पर बनते हुए हैवान

हादसों में सबको मदद करते हुए देखा है,

तलाशता हूं हमेशा खोई हुई आदमियत

चलते फिरते बुतों में छिपी हुई इंसानियत

घायलों को बचाने की कसमसाहट को देखा है,

बुरा वक्त होता है हादसे की शक्ल में सामने

मदद करने के लिए लोग लगते हैं हाथ थामने

“खतौली” में हमने पुराना हिन्दोस्तान देखा है।।

Death sentence 
Problems of accident scenes 
Having seen your real height, 
Someone’s fault or was negligence 
Was a conspiracy or aspiration of time 
Someone has seen death in death, 
Stretched feet proceed from simple steps 
Game made of life worsen 
Have seen life losing by accident, 
Willy-nilly 
Fluttering 
The injured have seen groans, 
Human beings engrossed in the limits of religion 
Haiwan on small things 
Everyone has seen help in the accidents, 
I’m always lost humanly 
Hidden humanoid 
Have seen the grief of saving the injured, 
Bad times are in the shape of the accident 
People seem to help hand pause 
In “Khatauli” we have seen the old Indian ..

“PKvishvamitra”

School!!//पाठशाला!!

बना लेते हैं यूंही तिनके बटोरकर परिन्दें घरौन्दा

घरौन्दे बनाने की कारीगरी यह किससे सीखते हैं,

देखा है हमने बिना बोई दूबडी घास का जाल

कौन है वह काश्तकार जो जंगली घास सींचते हैं,

दरियाओं के उफान पर डूबते उतरते हैं तिनके

पानी में तैरते यह तिनके किससे तैरना सीखते हैं,

मौसमी तूफान उजाड देते हैं अक्सर ही बस्तियां

खूंटे पर बंधे हुए बेबस पशु किससे बचाव सीखते हैं,

सचमुच बहुत कठिन है बच्चों को पालना पोसना

जंगली जानवर किससे बच्चों को पालना सीखते हैं,

सच है कि आवश्यकता ही है आविष्कार की जननी

अंडे से निकलते ही मुर्गी के सभी चूजे दाना बीनते हैं,

आसानी से सभी किस्म की जमीन में रेंग लेता है सर्प

रेशमी धागे जैसे महीन संपोले किससे रेंगना सींखते हैं,

काफी दिनों से खोज रहा हूं वह प्राकृतिक पाठशाला

जीव जन्तु जिसमें पढकर जिन्दगी को जीना सीखते हैं।।

School!!

Let’s make it 
The workmanship of the house, from whom do they learn, 
We have seen that without a bear 
Who is the tenant who weaves the wild grass, 
Sinking straws on the boom of rivers 
Whilst swimming in water, who learn to swim with this straw, 
Seasonal storms give off only settlements often 
Who are the untamed animals tied to the pegs to learn to defend, 
It is really difficult to cure the babies 
Whose wild animals learn to cure children, 
True, the necessity is the mother of invention 
All chicken peas are harvested as soon as they are released from the egg, 
Snake creeps easily into all kinds of land 
The silky threads, such as who are creep, 
Natural School 
Animal organisms that learn to live and live life.
“PKvishvamitra”

Stone!!पत्थर!!

पत्थर के टुकडों से तो बनते हैं मकान और भगवान

पता नहीं है क्यों लोगों ने मुझे पत्थर नाम अता किया

धूल भरी आंधी की तरह चलते बेपरवाह इंसान को

देकर पत्थर नाम सचमुच लोगों ने बेहद अहसान किया,

पत्थर ही दिया करते हैं बस्तियों को रिहायशी शक्ल

बालू के ढेर को कहकर पत्थर जर्रा नवाजी से लाद दिया,

कंक्रीट की आसमानी छत ही तो है जिंदगी का आसरा

पत्थर कहकर उन बेवकूफों ने मुझे इजज्त से लाद दिया,

ना पत्थर जैसी है मजबूती ना पत्थर जैसी सख्त जान

क्यों मेरे चाहने वालों ने तहजीब की हद को ही लांघ दिया,

किसी रास्ते का पत्थर हूं या हूं मैं कोई मील का पत्थर

बेहद सलीके से उन्होंने मेरा बिगडा  किरदार संवार दिया,

किसी मंदिर की मूरत ना सही मजार की तुरब्बत ही सही

ना चाहते हुए भी मेरे अजीजों ने मुझे एक सही मुकाम दिया,

जोड से जोड मिलाने की पत्थरीली फितरत मुझमें है कहां

गर्द और गुब्बार को अपनी चाहत का मुनासिब इनाम दिया।।

The pieces of stone are made of houses and god 
I do not know why people called me stone 
Walking like a dust storm 
By giving stone names, people really did very well,
The stones give only residual shape of settlements 
By throwing the sand out of stone, 
The sunny concrete of concrete is the place of life. 
By calling the stones, those idiots have imposed me on trial, 
No stone is like hardness like stone 
Why, my loved ones extended the extent of the tehajib, 
I am the stone of a path or am I a landmark 
With a lot of perseverance, he stole my spoiled character, 
The idol of a temple is not right 
Unbeknownst to me, my azims gave me a perfect place, 
Where is the stereotype to connect with the pair in me 
He gave a priceless gift to his heart and balloon.
“PKvishvamitra”

अतीत की परछाईयां//The shadow of past!!

समझता था मैं जी रहा हूं अकेला

जीवन के अग्निपथ पर हूं अकेला

साथ साथ होता था कोई महसूस

वह मेरी अतीत की परछाईयां थीं,

पुराना फेंककर नये नये की चाहत

जगह बदलने से लेकर सबकुछ ही

बदल लेने की उठती हुई सी सनक

वह मेरे दिमाग छिपी हुई बुराईयां थीं,

आज चुपके से कब कल में बदला

वो कल चुपके से ही आज बन गया

आज बना आने वाला कल ही बनेगा

यही समय की मस्त अंगडाईयां थीं,

सबके ही बीच बने रहने की इच्छायें

खोकर पाना और पाकर फिर खोना

खाली हाथ मलकर फिर से पछताना

मन का वहम बनी हुई तन्हाईयां ही थीं,

साथ चलना साथ चलकर साथी बनना

नहीं होकर होना होकर भी नहीं होना

जिद से हमकदम हमदामन बने रहना

वफाको नहीं समझना बदगुमांनियां थीं,

साथ न होकर भी रहो हमेशा ही साथ

दूर रहकर भी रहो हमेशा ही पास पास

जुदाईयों का कभी भी ना हो अहसास

सीख देती अतीत की ही परछाईयां थी।।

I used to think I was living alone 
I am alone on the fire of life 
Any feeling 
She was the shadow of my past, 
Throwing old and new wants 
Everything from changing the place 
Creeping up to change 
That was the hidden evil of my mind, 
Today when it’s secretly changed in tomorrow 
That day it became silent today 
Tomorrow will be made tomorrow 
It was a great time of the day, 
Everyone wants to stay in the middle 
Losing and finding and losing again 
Remorse 
There was a gap in the mind, 
Walk together 
Not being 
Stubbornness 
Wafa did not understand misunderstood, 
Stay together and always be together 
Stay away from always close pass 
Never realization of separation 
It was the shadow of the past.

मुंगेरीलाल//Lost in dreams!!


#मुंगेरीलाल
YQBaba
#YQDiidi

Follow my writings on https://www.yourquote.in/pramod-kaushik-df0a/quotes/ #yourquote

The peculiar steps are unobtrusive. 
Looking at the targets of the floors, 
Hunger hunger for long 
Always hunger on hunger, 
Never talk to us 
You will feel the pains that fall in the heart’s heart,
In the sky, there will be no holes in the sky 
Understanding Mungerilal, the world’s fascists will surely start to feel.

कल्पना लोक!!//Fiction!!

उभरते हैं वैचारिक श्रंखला में

कुछ अपरिचित से भित्तिचित्र,

श्रंगारित कल्पना के पटल पर

नृत्यशील दृश्य होते हैं विचित्र,

सम्मोहक मधुमासिक मधुरता

उत्साह वर्धित उमंगित तृप्तता,

उच्चस्तरीय नियामक संवेदना

स्वतन्त्र स्वछन्द जागृत चेतना,

नैसर्गिक आनन्ददायक प्रवास

उन्मुक्त स्वैच्छिक हासपरिहास,

अनुपम निश्कलंक चितधार्यता

विलक्षण अनुगमित स्वीकार्यता,

क्लेश अशांति की स्थिर न्यूनता

विद्यमान समस्त लौकिक पूर्णता,

कल्पित स्वर्ग की स्वपनवत् यात्रा

विभेदहीन अभिन्नता धारक मात्रा,

श्रंखलाबद्ध विचारों का उत्तम लोक

आकर्षक है यह मस्तिष्कस्थ परलोक।।

Are emerging in the conceptual series 
Graffiti from some unfamiliar, 
On the panoramic view panel 
Dancing scenes are bizarre, 
Hypnotic honey 
Enthusiastic euphoria, 
High level regulatory sensation 
Free radiant awakened consciousness, 
Natural pleasure trip 
Free voluntary hospitality, 
Anomalous flirtation 
Fantastic follow up acceptance, 
Steady reduction of distress unrest 
All existing cosmic completeness, 
Self-journey 
Differential integral holder volume, 
Great people of chain ideas 
It is fascinating.