ख्यालात!!

कब्रे जिस्मानी के ताबूत में कैद ख्यालात

इबारतों की शक्ल में सामने आया करते हैं,

तमन्नाओं में उलझी हुई हसरतों के खेल हैं ये

जो तडप की शक्ल में सामने आया करते हैं,

गजल कहो या नज्म कहो या फिर रूबाईयां कहो

अधूरे अरमान इन्ही की शक्ल में सामने आया करते हैं,

तकलीफ की धुन पर सजे हुए गमजदा दर्दे सितम 

नगमाई गुनगुनाहट की शक्ल में सामने आया करते हैं,

अफसानों के वही सिलसिले रहा करते हैं बदस्तूर

जिन्हें हम किस्से कहानियों की शक्ल में सुनाया करते हैं,

आजमाईशों से बेवास्ता रिश्ता ही होते हैं महफूज

परखने से तो ताल्लुक तयशुदा खराब हो जाया करते हैं,

गजलों में तरानों में छिपी हुई होती महज तकलीफें

जिन्हें शायराना अंदाज में शायर लोग सुनाया करते हैं।।

   

thoughts!!

Imprisoned in the coffin of the Cathedral 
Let’s look at the appearance of the documents, 
This is the game of the game 
Who appear in the shape of the sword, 
Say Gazal or Say Najm or Say Ruby 
Incomplete Armaan comes out in the same shape, 
Shy 
Nagmai comes out in the shape of humming, 
Do not be afraid of the same 
Whom we narrate in the form of stories, 
Experiences are difficult to deal with. 
By checking, the intermediate defaults are fixed, 
Gazals were hidden in the water 

Shire people who shirana style.

“Pkvishvamitra”

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3 thoughts on “ख्यालात!!”

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