“नामे मौत”

सबरस सबरंग तनतमूरा तन तान

चदरिया किसी दिन छोड जाऊंगा,

रहेगी ऐमाले ईमां असबाबे दौलत

साथ सभी का यूंही छोड जाऊंगा,

रूहे अदीबा को तो चाहिए आसमां

जमीनौ आसमान एक कर जाऊंगा,

अदबे चाहत की किताबे तो हैं बहुत

किताबे अहद यादगारी लिख जाऊंगा,

सिताराये आसमानी फितरत है छिपना

घायल चांद सैंकडो नुमांया कर जाऊंगा,

मत पूछना सबब-ऐ-शहादत मेरे दोस्त

वसीयत-ऐ-अश्क तेरे नाम कर जाऊंगा,

उधारी चुकाने का सफर रहा है ऊबाऊ

लबे बेबस गजले वफा गुनगुना जाऊंगा,

पता है तुझे दैरो हरम में है रहमते खुदा

मिजाजे फरिश्ताई चल मैं बता जाऊंगा,

हके हलाल की तराजू है सबके हाथों में

नाप तौल पैमाईश सबकी बता जाऊंगा,

है पुरसुकूं बेहद जिन्दगी आलमें फकीरी

फर्केअहतराम की तफ्सीलें बता जाऊंगा,

कब्रे जिस्म तो है हके हकीकी कब्रिस्तान

नामे मौत वजूदे रूह हासिल कर जाऊंगा।।

“PKVishvamitra,”

Advertisements

6 thoughts on ““नामे मौत””

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s