सुकूँ

नहीं दिखा पाऊंगा आज लिखकर

हुनरे हरूफिया जादूगरी मन उदास है।।

शाम-ऐ-जिन्दगी ढल रही है तेजी से

अंधेरी रात आ जाने का अहसास है।।

चांद चकौरी आ खडी हुई मेरे सिरहाने

सूखते हुए हलक में अजीब सी प्यास है।।

चंद ही कदमों का बचा है बाकी सफर

घुटी घुटी ऐ सांसों ये कैसा आभास है।।

दोतरफा लडाई अन्दरूनी बहरूनी भी

ठहर गया वक्ते समुन्दर क्यों हताश है।।

अभी तो बाकी हैं कर्जदारियां काफी

कम्बख्त किताबे बही किसके पास है।।

उधारियां चुकता करने की ख्वाहिशें

रखेंगी अभी जिंदा बाकी ये विश्वास है।।

उलझा है दिमाग जंगे असमंजस में

चंद रोज और जीने की तलबिया आस है।।

सिसक रही है आज अल्फाजिया कंगाली

सचमुच दिले फकीरा आज बहुत हताश है।।

नाउम्मीद है पूरी तरह आज अंदाजे ब्यानी

निगाहें गरीबां को खुद सुकूँ की तलाश है।।-

“PKVishvamitra”

Advertisements

10 thoughts on “सुकूँ”

  1. Bloggers Initiative

    ब्लॉग लिखने वाले (ख़ासकर कविता, कहानी,लेख) आदरणीय मित्रों को एक मंच पर लाने का एक विचार मन में आया है अगर आपको अच्छा लगे तो आप भी जुड़ें।

    इस मंच के माध्यम से हम एक दूसरे की रचनाएँ पढ़ सकेंगे और अपना पक्ष भी रख सकेंगे।

    हमें अनुभवी लेखको का मार्गदर्शन मिल सकेगा।

    अपनी रचनाओं को कहने का मंच मिल सकेगा।

    इस मंच के माध्यम से हम कवि/गोष्ठी/ बैठक आदि आयोजित कर सकते हैं।

    रचनाओं के प्रकाशन में मदद कर सकते हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण हम एक साहित्यिक वातावरण में अपना साहित्यिक विकास कर सकते हैं।

    आइये इस विचार को अमलीजामा पहनाने के प्रथम चरण में एक व्हाट्सऐप ग्रुप में माध्यम से मित्रों को जोड़ें जिसका लिंक नीचे दिया है।

    https://chat.whatsapp.com/6gIOeiTq8GS76uDFDoxegw

    Liked by 1 व्यक्ति

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s