भाषा का रूपान्तरण?.

भाषा का रूपान्तरण एक विकट समस्या है,इसमे प्रायः अर्थ का अनर्थ स्वरूप सामने आता है,सदैव पंक्तियों के भाव परिवर्तित हो जाते हैं,लेखक अपनी लेखनी से जिस मर्म को लेखन के कैनवास पर उकेरता है वह मर्म गौण हो जाता है अथवा विलुप्त ही हो जाता है,मैं अनेकों प्रयास कर चुका हूं किन्तु अनुवाद रचना समस्त भाव नष्ट कर देता है,अतः समस्त मित्र स्वयं के ज्ञान अथवा विधाओं के द्वारा ही रूपान्तरण अथवा अनुवादित विधियों/पद्धितियों का प्रयोग कर लिया करें,क्षमा याची!!

Share translated text-himmt-o-faulad

The power of the ladies is amazing.
Where do the top stone stars flown upwards,
There is a difference in the spread of hand stretches / hand
When the doves of the doves spread over the ground,
The moon stars of the crowd have taught only to see
Kastaat-o-Varjishash is the only thing from day to day,
Do not squeeze into the game of streak-e-diarrhea tears
Dash-o-Fauldad is the only one who does a great battle.

पाकीजा सच्चाई!!

सच्चाई भला कहां हुआ करती है खुबसूरत

बदरूहे सच की शक्ल बस आईना जानता है।।

पानी तो है तलबे हल्क की पुरसुकूँ उम्मीद

जायका-ऐ-आब को तो बस प्यासा जानता है।।

शक्ले बदरूहा के लिए क्यों शर्मिंदा हो आईना

जिगरे ख्याल की पाकीजगी तो खुदा जानता है।।

दैरो हरम की छांव में भी पनप जाते हैं गुनाह

नीयते खुद के फलसफे तो खुद इंसान जानता है।।

मंदिर पक्के,मस्जिद पक्की,गिरजे भी पक्के

दीनोंईमां के राजे कचावट को रब्बे रहमां जानता है।।

किसके तुफैल से है रोशन यह कायनात दोस्तों

कहां से ली है रोशनी बस यह तो आफताब जानता है।।

सच्चाई का नुमायां हो जाना है कितना डरावना

वजहावाते दहशत दिमागे गुनाहगार बखूबी जानता है।।

झटककर सच्चाई का दामन लगाता है कितनी दौड

अंजाम-ऐ-इम्तिहान की तफ्सील हर शख्स जानता है।।

ग़ैब के भी हैं ग़ैब तो इल्म के भी इल्म हैं हजारों

ग़बियत के पोशीदा हुनरे इल्मियत को ग़ैबी जानता है।।

आईनों का भी खुदाई आईना है एक वही खुदाया

बस वही सच्चाई में जज्ब पाकीजा खूबसूरती जानता है।।

PKVishvamitra”